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पढ़ो ऐसे कि जैसे तुम्हें सदा जीना है,

जियो ऐसे कि जैसे तुम्हें आज ही दुनिया से चले जाना है…

एक-क्लिक

एक क्लिक पर जो भी कुछ मिल जाता है, उससे ही केवल कहाँ ?यह जीवन चल पाता है !वह क्लिक करता रहा रातभर,और मैं सोता रहा रातभरसुबह को वह हारा हुआ था, थका हुआ था,वह अभी जीवन जीने को रुका हुआ था।मेरी आँखों में चमक थी, चाँदी-सी,उसे अब भी फिक्र थी चाँदी की।दिन गुजरा मानोContinue reading “एक-क्लिक”

माँग की सिन्दूर-रेखा (सबसे प्रिय कविता)- BY KUMAR Vishwas

माँग की सिन्दूर-रेखा, तुमसे यह पूछेगी कल… “यूँ मुझे सिर पर सजाने का तुम्हें अधिकार क्या है?” तुम कहोगी- “वह समर्पण बचपना था” तो कहेगी… “गर वो सब कुछ बचपना था, तो कहो फिर प्यार क्या है?” कल कोई अल्हड़, अयाना, बावरा झोंका पवन का, जब तुम्हारे इंगितों पर, गन्ध भर देगा चमन में, याContinue reading “माँग की सिन्दूर-रेखा (सबसे प्रिय कविता)- BY KUMAR Vishwas”

Happy Valentine's Day

अलग ही ठीक हैं हम, अगर ‘ठीक’ हैं हम!

दुष्ट काज़ी- A Akbar-Birbal story

एक दिन बादशाह अकबर के दरबार मे एक किसान आया, उसका नाम सैफ अली था। अकबर उससे कहतें हैं: अकबर – बोलो कैसे आना हुआ? सैफ अली – जहाँ पनाह छह महीने पहले मेरी बीबी गुज़र गई, जिसके चलते मैं अपनी ज़िंदगी मे बिल्कुल अकेला हो गया हूँ। अभी छह महीने पहले बहुत खुशी सेContinue reading “दुष्ट काज़ी- A Akbar-Birbal story”

'नाच' (कविता)- महाकवि 'अज्ञेय'

एक तनी हुई रस्सी है जिस पर मैं नाचता हूँ।जिस तनी हुई रस्सी पर मैं नाचता हूँवह दो खम्भों के बीच है।रस्सी पर मैं जो नाचता हूँवह एक खम्भे से दूसरे खम्भे तक का नाच है।दो खम्भों के बीच जिस तनी हुई रस्सी पर मैं नाचता हूँउस पर तीखी रोशनी पड़ती हैजिस में लोग मेराContinue reading “'नाच' (कविता)- महाकवि 'अज्ञेय'”

केवल तुक मिलाए

लेखनी चल निकली थी, मेरी किस्मत खूब फली थी, मैं सोकर भी चबाता था, मेरे हाथ ऐसी मूँगफली थी। मैंने ऐसे पल गुजारे थे, जिनमें हँसी के फव्वारे थे, जीवन में फूल थे कई, कई फूल काँटों के सहारे थे। घड़ियों को मैं तकता रहता था, मन भी कुछ खास बकता रहता था, उस परContinue reading “केवल तुक मिलाए”

बीरबल की खिचड़ी-Akbar Birbal story

दोस्तों आप सब ने हिंदी में एक कहावत सुनी होगी “बीरबल की खिचड़ी पकाना.” क्या आप जानते हैं कि इस कहावत के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। ये कहानी अकबर और उनके नवरत्न बीरबल से जुडी है। इसी कहानी के आधार पर प्रसिद्द कहावत “बीरबल की खिचड़ी पकाना” का उपयोग शुरू होता आया है। कहानीContinue reading “बीरबल की खिचड़ी-Akbar Birbal story”

अश्‍लील साहित्‍य (व्यंग्य किंतु सत्य)

शहर में ऐसा शोर था कि अश्‍लील साहित्‍य का बहुत प्रचार हो रहा है। अखबारों में समाचार और नागरिकों के पत्र छपते कि सड़कों के किनारे खुलेआम अश्‍लील पुस्‍तकें बिक रही हैं।दस-बारह उत्‍साही समाज-सुधारक युवकों ने टोली बनाई और तय किया कि जहां भी मिलेगा हम ऐसे साहित्‍य को छीन लेंगे और उसकी सार्वजनिक होलीContinue reading “अश्‍लील साहित्‍य (व्यंग्य किंतु सत्य)”

लड़ाई

चोपड़ा साहब और साहनी साहब के बंगले लगे हुए थे। बीच में एक दीवार थी। दाेनों एक-एक कुत्ता पाले थे। कुत्ते भयंकर थे और मुहल्ले के लोग डरते-डरते सड़क के दूसरे किनारे से निकलते थे। यों चोपड़ा साहब और साहनी साहब का स्वभाव और व्यक्तित्व ऐसा था कि उन्हें अलग से कुत्ता रखने की जरूरतContinue reading “लड़ाई”

Akbar birbal story

बीरबल एक ईमानदार तथा धर्म-प्रिय व्यक्ति था। वह प्रतिदिन ईश्वर की आराधना बिना नागा किया करता था। इससे उसे नैतिक व मानसिक बल प्राप्त होता था। वह अक्सर कहा करता था कि ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है। कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि ईश्वर हम परContinue reading “Akbar birbal story”

बंद कमरा- (कविता)

उस बंद कमरे में दो ही चीजें थीं, एक तो वह सन्नाटा, साँय-साँय का विलाप करता, उसके सुर अनायास मेरे कानों की संवेदनहीनता को समाप्त करते थे, और एक वह अंधेरा था, जिसे खत्म करने के लिये, एक ही दिया काफी था सघन अंधेरे और सन्नाटे, दोनों को नष्ट करने के लिये, कोई मसीहा आएगा,Continue reading “बंद कमरा- (कविता)”

वादों से, विवादों से नहीं मिलता!

वादों से, विवादों से नहीं मिलता, वो कमजोर इरादों से नहीं मिलता, वो मिलता है फकीरों को पैरों में जिनके ताज होते हैं, मन के सिकंदरों को मिलता है वो, महल के शहजादों को नहीं मिलता, झुकने वाले प्यादों की तो क्या बिसात, बड़े-बड़े नवाबजादों को नहीं मिलता । तलाशने उसे निकले हो? ख्याल रखना,Continue reading “वादों से, विवादों से नहीं मिलता!”

रिक्त-अरिक्त

रिक्त आकाश के रिक्त होने को, अरिक्त पक्षियों ने बना दिया। रिक्त-अरिक्तों के गूढ़ खेल को, खेलने से मैंने तो मना किया। वो जब जाएंगे उड़कर घरों में, तब फिर से शून्य-सा हो जाएगा। सब खेल खत्म हो जाएगा, और, अरिक्तपन खिलाड़ी ले जाएगा।

Hindi Poem on Girl Abuse – Main Janam Lu Bhi Ki Nahi — Hindi Poems|हिंदी कविता संग्रह

मैं जन्म लू भी कि नहीं? (कविता का शीर्षक)मैं क्या पहनूं,जो तेरी नज़र मेरे आँचल पर ना पड़े?मैं किस समय घर से निकलूं,जो तेरी नौका मेरे बांध से ना सटे?मैं किस तरह चलूँ,कि मेरी चाल तुझे न्योता ना लगे?मैं कैसे बोलूंजो तेरा खून का दौर सही दिशा में ही बहे?मैं जन्म लूँ भी कि नहीं,मैंने […]Continue reading “Hindi Poem on Girl Abuse – Main Janam Lu Bhi Ki Nahi — Hindi Poems|हिंदी कविता संग्रह”

पता चला!

तलाशने मैं जो चला था किसी वीराने शहर को, पता चला, दुनिया में मुझ-सा कोई वीराना नहीं था। अनजान हाथों को राह में जो थामा तो, पता चला, उन हाथों से कोई याराना नहीं था। खूब जब घूम लिया, कोने-कोने को छान लिया, पता चला, कोई शख्श नहीं था, जो अनजाना नहीं था। आज फिरContinue reading “पता चला!”

ठिठुरता हुआ गणतंत्र -हरिशंकर परसाई (व्यंग्य)

चार बार मैं गणतंत्र-दिवस का जलसा दिल्ली में देख चुका हूँ। पाँचवीं बार देखने का साहस नहीं। आखिर यह क्या बात है कि हर बार जब मैं गणतंत्र-समारोह देखता, तब मौसम बड़ा क्रूर रहता। छब्बीस जनवरी के पहले ऊपर बर्फ पड़ जाती है। शीत-लहर आती है, बादल छा जाते हैं, बूँदाबाँदी होती है और सूर्यContinue reading “ठिठुरता हुआ गणतंत्र -हरिशंकर परसाई (व्यंग्य)”

चींटी का भविष्य

चींटी, एक ज्योतिषी हूँ मैं, मुझे लकीरें दिखाओ, अपने हाथ-पैरों की देखूँ तो तुम्हारा भविष्य, कहाँ तक का सफर रहेगा, पर्वत कौन-से चढ़ने होंगे, कितनी खाइयों की गहराइयाँ नापनी होंगी, कितनी दफा भार खुद से अधिक का उठाना होगा, कितनी बार उठाकर दाने को दूर गोदाम तक पहुँचाकर, अपना नाम दर्ज कराना होगा चींटी, मुझेContinue reading “चींटी का भविष्य”

पानी का ग्लास और सेठ की प्यास

एक बार किसी रेलवे प्लेटफार्म पर जब गाड़ी रुकी, तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला। ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसको आवाज दी, ‘ऐ लड़के इधर आ।’ लड़का दौड़कर आया। उसने पानी का ग्लास भरकर सेठ की ओर बढ़ाया, तो सेठ ने पूछा, ‘कितने पैसे में?’ लड़के ने कहा, ‘पच्चीस पैसे।’ सेठ नेContinue reading “पानी का ग्लास और सेठ की प्यास”

रातभर…

ओस फूलों पर पड़ी थी रातभर, सूरज! तुम कहां गये थे रातभर? फूल! काफी मुस्कुरा रहे हो आज, किससे बातें होती रहीं रातभर? सुगंध कैसी अनोखी आज इनकी है! चाँद! इत्र छिड़क गया होगे रातभर। आने वाले कल ये मुरझाने वाले हैं, काँटो! बड़े प्रेम से रहना आज रातभर।

बीतेंगे..

बीतेंगे हम फिर जन्मेंगे जीयेंगे फिर बीतेंगे फिर जन्मेंगे हारेंगे या जीतेंगे, नहीं पता बीतना, जन्मना, जीना और बीतना इसके लिए ही केवल क्यों सीखना? क्यों जानना? सूरज, तारों के जन्मकाल अधिक हैं लेकिन वे भी बीतेंगे और जन्मेंगे क्या वे भी सीखेंगे? और हम? शायद फिर से हम केवल बीतेंगे और जन्मेंगे, या जीतेंगेContinue reading “बीतेंगे..”

कवि सोचता है…

कवि सोचता है कि वो निर्जीव खड़ी साईकिल भी उससे कुछ कह रही है। सोचता दो पहिये वाली वो उड़कर उसके मन में बह रही है। कवि सोचता है कि वो गतिमान पतंग उससे कुछ कहना चाहती है, सोचता धागे से बँधकर वो न कटना, सदा आकाश में रहना चाहती है। कवि सोचता है किContinue reading “कवि सोचता है…”

सारा देश जल रहा है।

सर्द मौसम तो बहुत है,पर क्या तुम्हें सर्दी लग रही है?सूरज से कह दो उसकी जरूरत नहीं है,काफी ऊष्मा, अग्नि है यहाँसुनो, हाथ सेको आग में, देखोसारा देश जल रहा है। जो कहीं भी ये आग मन्द पड़ती, द्वार-खिड़कियाँ खोल हवा को आने देते हो, तुम सहायक होते हो, तुम लकड़ियाँ डालते रहते इसमें, भूलकरContinue reading “सारा देश जल रहा है।”

प्रेरणादायी कहानियाँ-2 – व्यर्थ की बातें

एक बार सुकरात बाजार से गुजर रहे थे, तो रास्ते में उनकी एक मुलाकात एक परिचित व्यक्ति से हुई। उन सज्जन ने सुकरात को रोककर कुछ बताना शुरु किया। वह कहने लगा कि क्या आप जानते हैं कि कल आपका मित्र आपके बारे में क्या कह रहा था? सुकरात ने उस व्यक्ति की बात वहीं रोकते हुयेContinue reading “प्रेरणादायी कहानियाँ-2 – व्यर्थ की बातें”

प्रेरणादायी कहानियां-1- संगति का महत्व

एक अध्यापक अपने शिष्यों के साथ घूमने जा रहे थे। रास्ते में वह अपने शिष्यों को अच्छी संगत की महिमा समझा रहे थे, लेकिन शिष्य इसे समझ नहीं पा रहे थे। तभी अध्यापक ने फूलों से भरा गुलाब का पौधा देखा। उन्होंने एक शिष्य को उस पौधे के नीचे से तत्काल एक मिट्टी का ढेला उठाकरContinue reading “प्रेरणादायी कहानियां-1- संगति का महत्व”

जाओ और जाकर दरवाजा खोल दो- Miraslav Holub

दरवाजा जाओ और जाकर दरवाजा खोल दो… हो सकता है बाहर खड़ा कोई दरख्त, या जंगल भी या कोई बाग भी हो सकता है हो सकता है कोई जादुई शहर ही खड़ा हो। जाओ और जाकर दरवाजा खोल दो… हो सकता है कोई कुत्ता धक्के मार रहा हो कोई चेहरा भी दिखाई दे सकता हैContinue reading “जाओ और जाकर दरवाजा खोल दो- Miraslav Holub”

पंडित को मिला एक गणिका से प्रश्न का उत्तर

एक पंडित कई वर्षों तक काशी में शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद गांव लौटे। एक दिन एक किसान उनके पास आया और पूछा कि पंडित जी हमें यह बतलाइये कि पाप का गुरु कौन है? प्रश्न सुनकर पंडित जी चकरा गए, उन्होंने धर्मगुरु और आध्यात्मिक गुरु तो सुना था किन्तु पाप का भी गुरुContinue reading “पंडित को मिला एक गणिका से प्रश्न का उत्तर”

सच्चा श्राद्ध- कबीर की कहानी

एक दिन गुरु रामानंद ने कबीर से कहा कि हे कबीर! आज श्राद्ध का दिन है और पितरों के लिये खीर बनानी है। आप जाइए और पितरों की खीर के लिये दूध ले आइये। कबीर उस समय एक बालक ही थे, वे दूध के लिये बर्तन लेकर चल पड़े। चलते–चलते रास्ते में उन्हें एक मरीContinue reading “सच्चा श्राद्ध- कबीर की कहानी”

बुद्ध की कहानियाँ-1 (पुत्र वियोग से पीड़ित स्त्री)

बात उन दिनों की है, जब ज्ञान प्राप्त होने के बाद गौतम बुद्ध आम जनता के बीच उनके दुखों से मुक्ति के उपाय बताते हुए बाकी जीवन को गुजारने का फैसला कर चुके थे। उनकी उनकी कीर्ति भी फैलने लगी थी। एक बार उनके पास एक स्त्री आई और विलाप करने लगी कि उसके इकलौतेContinue reading “बुद्ध की कहानियाँ-1 (पुत्र वियोग से पीड़ित स्त्री)”

दिव्यांगना का जवाब

वह वरिष्ठ नागरिक सीट पर बैठी हैडफोन लगाए अपने आप में मस्त थी, जब मैंने मैट्रो में प्रवेश किया। बहुत सुंदर तो नहीं कह सकता था, पर भारतीय परिवेश की दृष्टि से बेहतर ही थी। पहनावा भी सभ्य और आकर्षक ही था। लेकिन एक बात जो मैं नहीं समझ पाया था, वह थी उसके सिर्फContinue reading “दिव्यांगना का जवाब”

खोयी हुई घड़ी की खोज

एक गांव में एक किसान रहता था। उसके पास एक घड़ी थी जिसे वह हमेशा अपने हाथ में समय देखने के लिये बांधता था, लेकिन वह सोते समय वह घड़ी उतारकर सोता था। एक दिन सुबह उठकर जब उसने अपनी घड़ी पहननी चाही, लेकिन उसे अपनी घड़ी कहीं नहीं मिली। उसकी घड़ी कहीं खो गईContinue reading “खोयी हुई घड़ी की खोज”

अभ्यास की शक्ति- वरदराज की कहानी

प्राचीन भारत में एक बालक था। उसकी स्मरणशक्ति अत्यंत दुर्बल थी। अपने सहपाठियों में उसकी गिनती पीछे से शुरु होती थी। जब वह पाँच वर्ष का था, तभी वह गुरुकुल शिक्षा के लिये आ गया। दस वर्ष बीत जाने के बाद भी वह आगे नहीं बढ़ पाया। सभी साथी उसका मजाक उड़ते हुए उसे वरदराज(बैलोंContinue reading “अभ्यास की शक्ति- वरदराज की कहानी”

मन साध लिया तो सब साध लिया

प्राचीन समय में धनुर्विद्या को शौर्य, पराक्रम और साहस का प्रतीक माना जाता था। उस समय एक युवक को अपनी धनुर्विद्या पर बहुत घमंड था और वह अपने आपको श्रेष्ठ धनुर्धर समझता था। उसने एक बार एक संत जो खुद धनुर्विद्या के ज्ञाता थे, को मुकाबले में चुनौती दी। पहले युवक ने अपने कौशल काContinue reading “मन साध लिया तो सब साध लिया”

खुशी कहाँ छिपी होती है?- A Story

वॉचमैन रामशरण अकेला और लोगों की फरमाइशें अलग-अलग। कभी फाटक खोलने की कभी बंद करने की। आजकल एक काम और आया है, लोग जो फ्लैट में हैं खूब घूमने जा रहे हैं। रामशरण इधर आओ, सामान गाड़ी में रख दो। साहब कहीं जा रहे हैं? उसने पूछा। हाँ छुट्टी जो हुई हैं। कैम्पस से कोई-न-कोईContinue reading “खुशी कहाँ छिपी होती है?- A Story”

चर्चित पुस्तक 'अल्केमिस्ट' से प्रेम प्रसंग

अंत में एक नवयुवती वहाँ पर आई जो काले कपड़ों में नहीं थी। उसके कंधे पर एक बर्तन था। उसका सिर तो ढका हुआ था मगर चेहरा खुला हुआ था। लड़के ने उसके पास जाकर कीमियागर का पता पूछना चाहा। उस क्षण उसे लगा कि वक्त ठहर गया है और उसकी अंतरात्मा उससे कुछ कहContinue reading “चर्चित पुस्तक 'अल्केमिस्ट' से प्रेम प्रसंग”

|| प्रेम की खोज ||

Originally posted on Shivesh's Blog:
“प्रेम हमने भी किया, प्रेम तुमने भी किया.. “हमने प्रेम में पड़कर शायद, प्रेम की सत्ता को समझ लिया.. !! “तुमने प्रेम में पड़कर शायद, स्वयं को ही खो दिया.. !! “समर्पित होकर भी नहीं की.. हमने वासनाओं की गुलामी !! “वासनाओं को समर्पित होकर.. तुमने ना जाने कहां-कहां…

काम करती स्त्री- माया एंजेलो की कविता

काम करती स्त्री मुझे बच्चों की देखभाल करनी है कपड़े सिलने हैं पोछा लगाना है बाजार से सामान लाना है फिर चिकन फ्राई करना है पोछना है बच्चे का गीला बदन पूरे कुनबे को खाना खिलाना है बगीचे से खरपतवार हटाना है कमीजों पर इस्त्री करनी है कनस्तर काटना है साफ करनी है यह झोपड़ीContinue reading “काम करती स्त्री- माया एंजेलो की कविता”

सिक्के के दो पहलू- रुडयार्ड किपलिंग

सिक्के के दो पहलू मैं निकलूंगा संसार में, मैं नाम कमाऊंगा मैं सत्य के लिये लडूंगा, प्रतिष्ठा के लिये संघर्ष करूंगा मैं जीत लाऊंगा सच्चा प्यार, और जब मैं मरूंगा दुनिया मेरी योग्य रूप में प्रशंसा करेगी। वह संसार में गया- प्रतिष्ठा के लिये उसने संघर्ष किया उन लोगों ने उसे अपमान की काँटेदार मालाContinue reading “सिक्के के दो पहलू- रुडयार्ड किपलिंग”

कुछ बहुत बुरा होने के इंतजार में…

एक से गांव में एक बूढ़ी औरत रहती थी, जिसके दो बच्चे थे, पहला सत्रह साल का, दूसरा चौदह का। वह उन्हें नाश्ता परोस रही है। और उसके चेहरे पर किसी चिंता की लकीरें स्पष्ट हैं। बच्चे उससे पूछते हैं कि उसे क्या हुआ है, तो वह बोलती है, “मुझे नहीं पता, लेकिन मैं इसContinue reading “कुछ बहुत बुरा होने के इंतजार में…”

आधी रात के बाद मैं- 1

आधी रात को भी आवाजें आती हैं, लोगों की चिल्लाते हुए क्या सुख इतना भी नहीं है इन्हें कि सो भी नहीं सकते, कुत्तों भी इनसे कम शोर कर रहे हैं। क्या ये पूरा जीवन बस इसी बहस में बिता देंगे कि सामने वाले को कोई वस्तु उनसे अधिक क्यों मिल गई। अगर इनका जीवनContinue reading “आधी रात के बाद मैं- 1”

हरिवंशराय बच्चन की बेहतरीन कवितायें- संग्रह 2

क्या मैं जीवन से भागा था? क्या मैं जीवन से भागा था? स्वर्ण श्रृंखला प्रेम-पाश की, मेरी अभिलाषा न पा सकी, क्या उससे लिपटा रहता जो कच्चे रेशम का तागा था! क्या मैं जीवन से भागा था? मेरा सारा कोष नहीं था, अंशों से संतोष नहीं था, अपनाने की कुचली साधों में मैंने तुमको त्यागाContinue reading “हरिवंशराय बच्चन की बेहतरीन कवितायें- संग्रह 2”

अगर कुछ करना है तो…

अगर कुछ करना है तो… अगर कुछ करना है तो कर डालो वरना शुरु भी मत करना अगर कुछ करना है तो कर डालो भले ही तुमसे छूट जाए तुम्हारी प्रेमिका या पत्नी या नौकरी या फिर तुम्हारा दिमाग लेकिन तुम कर डालो हो सकता है तुम कुछ खा भी न पाओ कई दिनों तकContinue reading “अगर कुछ करना है तो…”

सच्चे नायक – जॉर्ज वाशिंगटन

अमेरिका में एक स्थान पर सैनिकों के आवास के लिये एक निर्माण कार्य प्रचलित था। उसके दरवाजे के निर्माण के लिये लकड़ी का एक बहुत बड़ा खंड लाया गया था। कुछ सैनिक उस लकड़ी के खंड को भूमि से उठाकर गाड़ी पर चढ़ाने के लिये लगाए गए थे, किंतु लकड़ी के बहुत भारी होने सेContinue reading “सच्चे नायक – जॉर्ज वाशिंगटन”

जिसका कोई निशाना खाली न जाए- मुंशी प्रेमचंद्र

सालना इम्तिहान हुआ। भाई साहब फेल हो गए, मैं पास हो गया और दरजे में प्रथम आया। मेरे और उनके बीच केवल दो साल का अंतर रह गया। जी में आया, भाई साहब को आड़े हाथों लूं-आपकी वह घोर तपस्या कहाँ गई? मुझे देखिये मजे से खेलता भी रहा और दरजे में अव्वल भी हूँ।Continue reading “जिसका कोई निशाना खाली न जाए- मुंशी प्रेमचंद्र”

इस पार प्रिये मधु है तुम हो- हरिवंशराय बच्चन

इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा! यह चांद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन का, लहरा-लहरा यह शाखाएं कुछ शोक भुला देती मन का, कल मुर्झाने वाली कलियां हंसकर कहती हैं मगन रहो, बुलबुल तरु की फुनगी पर से संदेश सुनाती यौवन का, तुम देकर मदिरा के प्यालेContinue reading “इस पार प्रिये मधु है तुम हो- हरिवंशराय बच्चन”

बादल को घिरते देखा है- नागार्जुन

बादल को घिरते देखा है। अमल धवल गिरि के शिखरों पर, बादल को घिरते देखा है। छोटे-छोटे मोती जैसे उसके शीतल तुहिन कणों को, मानसरोवर के उन स्वर्णिम कमलों पर गिरते देखा है, बादल को घिरते देखा है। तुंग हिमालय के कंधों पर छोटी-बड़ी कई झीलें हैं, उनके श्यामल नील सलिल में समतल देशों सेContinue reading “बादल को घिरते देखा है- नागार्जुन”

हरिवंशराय बच्चन की बेहतरीन कवितायें- संग्रह 1

मित्रों, जिनका नाम ही लेने को मैं छोटा हूँ, वहाँ पर उनकी कविताओं को जानने और समझने का प्रयास मेरे द्वारा हो रहा है इस बात से ही मैं चकित हूँ। मुझे कई लेखक और उनकी कवितायें पसंद हैं। उदाहरण के तौर पर रामधारी सिंह ‘दिनकर’, जयशंकर प्रसाद, अज्ञेय, नागार्जुन, मैथिलीशरण गुप्त आदि सभी कोContinue reading “हरिवंशराय बच्चन की बेहतरीन कवितायें- संग्रह 1”

नींद में निर्मल होते हैं हम- कारेल चपेक

रात होते ही दूसरी जिंदगी शुरु हो जाती है, पीड़ा और दुविधा से भरी हुई। जो आदमी सो नहीं पाता, वह किसी भी चीज से छुटकारा नहीं पा सकता। जब आदमी सो नहीं पाता, तो शुरु-शुरु में वह किसी के बारे में कुछ नहीं सोचना चाहता। वह या तो गिनती गिनने लगता है, या प्रार्थनाContinue reading “नींद में निर्मल होते हैं हम- कारेल चपेक”

शिक्षा और मानव मस्तिष्क का सदुपयोग

शिक्षक वह नहीं होता, जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है, जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिये तैयार करे। शिक्षा द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है। अतः विश्व को एक ही ईकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन करना चाहिये। ज्ञान हमेंContinue reading “शिक्षा और मानव मस्तिष्क का सदुपयोग”

अनमोल चित्र(कहानी)

दिन निकलते ही सूरज ने आग उगलना शुरु कर दिया था। उमस से जंगल में लकड़ी काटते हुए कमली को सारा शरीर पसीने से लथपथ हो गया था। माँ! और कितनी देर लगेगी? घीसू कुछ देर और लगेगी लकड़ी काटने में। उसने अपने हाथों की गति और बढ़ा दी, ताकि लकड़ियाँ काटकर बाजार पहुँच सके। लकड़ी काContinue reading “अनमोल चित्र(कहानी)”

अब्राहम लिंकन का पत्र- कविता रूप में

हे शिक्षक! मैं जानता हूँ और मानता हूँ कि न तो हर आदमी सही होता है और न ही होता है सच्चा; किंतु तुम्हें सिखाना होगा कि कौन बुरा है और कौन अच्छा दुष्ट व्यक्तियों को साथ-साथ आदर्श प्रणेता भी होते हैं स्वार्थी राजनीतिज्ञों के साथ समर्पित नेता भी होते हैं दुश्मनों के साथ-साथ सुंदरContinue reading “अब्राहम लिंकन का पत्र- कविता रूप में”


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