सबसे बड़ा सुख?- अकबर-बीरबल कहानी

एक बार की बात है, एक दिन बादशाह अकबर ने अपने दरबार में पूछा, ‘आपको क्या लगता है, किसी व्यक्ति को सबसे अधिक सुख किस चीज से मिलता है ?’

दरबारी एक-एक करके जवाब देने लगे । एक दरबारी ने कहा, ‘खुदा की खिदमत करना सबसे बड़ा सुख है जहाँपनाह ।’

बादशाह के इर्द-गिर्द हमेशा हर तरह के चाटुकर होते हैं । तो किसी दूसरे ने कहा, ‘ओ मेरे मालिक मुझे सबसे अधिक सुख आपकी सेवा से मिलता है !’

तीसरे दरबारी ने कहा, ‘बस आपका चेहरा देखते रहने से मुझे सबसे अधिक खुशी मिलती है !’

चारों तरफ से ऐसी ही चापलूसी भरी बातें होने लगीं । बीरबल बस वहाँ चुप बैठे हुए थे और ऊब रहे थे ।

अकबर ने पूछा, ‘बीरबल तुम इतने चुप क्यों हो ? वह क्या है, जो तुम्हें सबसे अधिक सुख देता है ?’

बीरबल ने कहा, ‘मल त्याग करना ।’

अब तक अकबर लोगों से तारीफें सुनकर फूले नहीं समा रहे थे । अचानक ऐसी बात सुनकर वे गुस्से से पागल हो गए । उन्होंने कहा, ‘दरबार में ऐसी अभद्र बात कहने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? तुम्हें इसे साबित करना होगा । अगर तुम इसे साबित नहीं कर पाए तो तुम्हारी जिंदगी की खैर नहीं ।’

बीरबल ने कहा, ‘मुझे पंद्रह दिन का समय दीजिये । मैं आपको साबित करके दिखाऊंगा ।’

अकबर ने कहा, ‘ठीक है ।’

अगले सप्ताह के अंत में बीरबल ने अकबर के लिये जंगल में शिकार का एक कार्यक्रम बनाया, साथ ही यह भी इंतजाम किया कि महल की सारी महिलायें भी इस शिकार के अभियान में साथ चलें । उन्होंने कैंप को इस प्रकार बनाया कि अकबर का टेंट एकदम बीच में हो और उसके चारों तरफ परिवार, बच्चे और महिलाओं के टेंट हों । उन्होंने खाना बनाने वालों को बेहतरीन खाना बनाने का हुक्म दिया । उन्होंने बड़ा अच्छा खाना तैयार किया और अकबर ने जी भरकर खाया । वैसे भी वे छुट्टी मना रहे थे ।

अगली सुबह जब अकबर की नींद खुली और टेंट से बाहर आए, तो देखा कि शौचालय का कोई टेंट नहीं है । वे अपने टेंट में लौट गए और चहलकदमी करने लगे, लेकिन पेट में दबाव बढ़ता जा रहा था । वे जंगल की ओर जाने के लिये निकले, लेकिन बीरबल ने ऐसा इंतजाम किया था कि हर तरफ महिलायें मौजूद थीं । उन्हें अपने लिये कहीं कोई जगह नहीं मिली ।

हर मिनट दबाव बढ़ता जा रहा था । दोपहर के बारह बजने को आए, और अकबर से अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था । वे फटने ही वाले थे । उधर बीरबल, जो सारा तमाशा देख रहे थे, यह बुदबुदाते हुए घूम रहे थे कि ‘शौचालय का टेंट कहाँ लगाऊँ, कहाँ लगाऊँ ?’ वे जानबूझकर टेंट लगाने में देरी कर रहे थे ।

बादशाह अब बिल्कुल नहीं रुक सकते थे । तभी बीरबल ने शौचालय का टेंट लगा दिया । अकबर अंदर गए और उनके मुँह से राहत की साँस निकली । अकबर के बाहर आने पर बीरबल ने पूछा, ‘क्या अब आप मेरी बात से सहमत हैं ?’

अकबर ने कहा, ‘बेशक यही सबसे बड़ा सुख है ।’

ऐसी चीज जो आप अपने अंदर नहीं रोककर नहीं रख सकते, उससे छुटकारा ही हमेशा सबसे बड़ा सुख होता है ।

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