सिक्के के दो पहलू- रुडयार्ड किपलिंग

RUDYARD KIPLING

सिक्के के दो पहलू

मैं निकलूंगा संसार में, मैं नाम कमाऊंगा

मैं सत्य के लिये लडूंगा, प्रतिष्ठा के लिये संघर्ष करूंगा

मैं जीत लाऊंगा सच्चा प्यार, और जब मैं मरूंगा

दुनिया मेरी योग्य रूप में प्रशंसा करेगी।

वह संसार में गया- प्रतिष्ठा के लिये

उसने संघर्ष किया

उन लोगों ने उसे अपमान की काँटेदार माला में

लपेट दिया

मैं उससे एक बार और मिला, बिल्कुल अचानक

उसके चेहरे पर दुख के निशान थे।

क्या तुम सत्य के लिये लड़ लिये? क्या तुमने निरर्थक प्रयास किया?

क्या तुमने पा लिया बिना दाग का सच्चा पवित्र प्यार?

क्या अब भी तुम्हारा नाम बड़ा हो गया है? क्या यह होगा कभी?

क्या तुम्हारी सारे लोग करने लगे हैं उचित प्रशंसा?

उसने जवाब नहीं दिया- उसने बोला नहीं 

बल्कि लाल पड़े गालों में थोड़ी देर ठहरा रहा

फिर काँपते हुए, हिचकिचाते हुए और देखते हुए जमीन में-

हे भगवान! वह मुझसे मांगने लगा पैसे कोई आधे क्राउन।

अरे! जैसे कोई छोटा बच्चा

अरे! जैसे कोई छोटा बच्चा

देखता है अपनी खिड़की से एक बड़े कस्बे पर

देखता है वे छतें जहाँ तक

निगाहें पहुँचती हैं उसकी

लेकिन नहीं सोचता, नहीं जानता- इतना ही नहीं,

विश्वास नहीं करेगा

कि वहाँ हैं कितने ही पिता, माता, बहनें, घर

ठीक उसकी तरह हजारों घरेलू बातें

तौर-तरीके और परंपराएं-

इसी तरह मैंने देखा संसार अपने लाखों भाइयों के

साथ फिर मैंने लिखा

और मेरी पूरी रचना बिल्कुल सुलगती नई उपज थी

एक दिमाग की

जो प्रेम और भरोसा करता था

इसमें पर यह संसार उदासीन-सा चुपचाप मुझसे गुजर गया

लिहाजा मैंने क्रोध में गाया!

जब गुजरते बरस अपने साथ लाए ठंडगी,

बड़ी देर में मैंने पाया

कि यहाँ थे दसों हजार,

हजारों विचार मेरी तरह के।

-रुडयार्ड किपलिंग

रुडयार्ड किपलिंग (1865-1936) एक ब्रिटिश लेखक और कवि थे। ब्रिटिश भारत में बंबई में जन्मे, किपलिंग को मुख्य रूप से उनकी पुस्तक ‘द जंगल बुक’, ‘किम (साहस की कहानी)’, ‘द मैन हु वुड बी किंग’ और उनकी कविताएं जिसमें ‘मंडालय’, ‘गंगा दीन’ और ‘इफ’ शामिल हैं, आदि के लिए जाने जाते हैं। उन्हें “लघु कहानी की कला में एक प्रमुख अन्वेषक” माना जाता है।

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