चर्चित पुस्तक ‘अल्केमिस्ट’ से प्रेम प्रसंग

अंत में एक नवयुवती वहाँ पर आई जो काले कपड़ों में नहीं थी। उसके कंधे पर एक बर्तन था। उसका सिर तो ढका हुआ था मगर चेहरा खुला हुआ था। लड़के ने उसके पास जाकर कीमियागर का पता पूछना चाहा।

उस क्षण उसे लगा कि वक्त ठहर गया है और उसकी अंतरात्मा उससे कुछ कह रही है। उसने जब उस नहयुवती की कीली आँखों में झाँककर देखा, उसका होंठ देखे जो मुस्कुराहट और खामोशी के बीच ठहरे हुए से थे, तब उसे दुनिया की वह भाषा फौरन समझ में आ गई, जो सभी बोलतो हैं, समझते हैं…अपने दिल से। वह प्यार था। मानवता से भी पुराना…रेगिस्तान से भी पुराना! जब भी दो आँखें मिलती हैं, ऐसा ही होता है, जैसा कि इस कुएँ पर हुआ। वह मुस्कुरा दी। यह निश्चय ही एक शुभ शकुन था, जिसका वह, बिना जाने ही सारी जिंदगी इंतजार करता आया था। जिसे वह ढूँढ रहा था अपनी भेड़ों में, किताबों में क्रिस्टलों में और रेगिस्तान की खामोशा में।

वह दुनिया की शुद्धतम भाषा थी। उसका मतलब समझाने की कोई जरूरत नहीं होती, ठीक उसी तरह जैसे अंतहीन समय में परिक्रमा करती पृथ्वी को कुछ भी समझाने की जरूरत नहीं होती। लड़के को उसी क्षण लगा कि वह अपने जीवन की एकमात्र और अद्वितीय स्त्री के सामने है…और यह कि बिना शब्दों की जरूरत के उस स्त्री को भी यही लगा था। दुनिया की किसी चीज पर यकीन से ज्यादा उसे इस अहसास पर यकीन था। उसके माता-पिता, दादा-दादी ने उसे बताया था कि प्रेम तो जरूर करना चाहिये, लेकिन वचन देने से पहले दूसरे को समझ लेना बहुत जरूरी है। जो ऐसा सोचते हैं, उन्होंने कभी सार्वभौम भाषा नहीं सीखी। जो इस भाषा को जानते हैं, उन्हें मालूम है कि इस दुनिया में कोई है जो उसका इंतजार कर रहा है, वह फिर चाहे रेगिस्तान के बीचों-बीच हो या किसी बड़े शहर में। जब कभी, दो ऐसे व्यक्ति मिलते हैं उनकी नजरें मिलती हैं, तो अतीत और भविष्य बेमानी हो जाता है। तब रह जाता है केवल वह क्षण और इत्मीनान, एक इतना गहरा यकीन कि दुनिया में जो कुछ भी है, सब कुछ उसी एक के हाथों पहले से लिखा हुआ है। वही हाथ प्यार पैदा करता है और दुनिया में हरेक के लिये जुड़वाँ आत्मा। ऐसे प्यार के बिना किसी के सपनों का कोई अर्थ नहीं है।

मकतूब, लड़के ने सोचा। अंग्रेज ने लड़के को झकझोरते हुए कहा, कहाँ खो गए? पूछो न! लड़का उस नवयुवती के थोड़ा और पास आ गया। और जब वह मुस्कुराई तो वह भी मुस्कुरा दिया।

क्या नाम है तुम्हारा? लड़के ने पूछा।

फातिमा! लड़की ने नजरें झुकाकर कहा।

मेरे देश में भी कुछ स्त्रियों का यही नाम है।

फातिमा पैगंबर की बेटी थीं, हमलावरों ने इस नाम को सब देशों में फैला दिया, खूबसूरत लड़की ने हमलावरों शब्द पर थोड़ा अभिमान जताया।

अंग्रेज ने उसे फिर याद दिलाया और लड़के ने लोगों की बीमारी को इलाज करने वाले का पता पूछा। वही जो दुनिया के सारे रहस्य जानता है! उसने कहा। जो रेगिस्तान के जिन्नात से बातें करता है। जिन्नों में अच्छी और बुरी दोनों तरह की आत्माएं बसती हैं।

और लड़की ने दक्षिण की तरफ इशारा करते हुए उस अजीब आदमी का ठिकाना बताया। फिर उसने अपने बर्तन में पानी भरा और वहाँ से चली गई।

और अंग्रेज भी वहाँ से गायब हो गया, कीमियागर को तलाशने के लिये। लड़का कुएँ की मुँडेर पर देर तक बैठा रहा और याद करने लगा वह दिन, जब तरीफा में भूमध्यसागरीय हवा का एक झोंका इसी नवयुवती की खुशबू लेकर आया था। और उसने उसे तब भी प्यार किया था, जब उसे यह मालूम भी नहीं था कि ऐसी किसी औरत का अस्तित्व भी है। उसे पक्का यकीन हो गया था कि उसका यह प्यार ही दुनिया का हर खजाना ढूँढ़ लेने में उसकी मदद करेगा।

अगले रोज लड़का फिर कुएँ पर गया इस उम्मीद में कि शायद फिर से उस लड़की का दीदार हो जाए। आश्चर्य की बात यह थी कि वह अंग्रेज वहाँ मौजूद था और रेगिस्तान को एकटक देखे जा रहा था।

“मैं पूरी दोपहर और शाम कीमियागर से मिलने का इंतजार करता रहा,” उसने कहा, “शाम के पहले तारे के साथ वह बाहर आया।” मैंने बताया कि मुझे किस चीज की तलाश है और तब उसने मुझसे पूछा कि क्या मैंने कभी सीसे को सोने में बदला है? मैंने कहा, “वही सीखने के लिये ही तो मैं यहाँ आया हूँ।”

तो उसने मुझसे कहा, “मुझे वैसा करने की कोशिश करनी चाहिये।” बस फिर बोला, “जाओ और कोशिश करो।”

लड़का चुप रहा। बेचारा अंग्रेज क्या इतनी दूर का सफर तय करके यही सुनने आया था कि जाओ, फिर कोशिश करो जबकि वह ऐसी कोशिशें कई बार कर चुका है।

“ठीक है, तो फिर से कोशिश करो,” उसने अंग्रेज से कहा।

“वही करूंगा, मैं जा रहा हूँ, शुरु करने।”

अंग्रेज चला गया तो फातिमा कुएँ पर आई। वह पानी भरने लगी तो लड़के ने उससे कहा, “मैं तुमसे एक ही बात कहने आया हूँ…मैं तुमसे प्यार करता हूँ…क्या तुम मेरी बीवी बनना मंजूर करोगी?”

लड़की के हाथ से बर्तन छूट गया और पानी बिखर गया।

“मैं हर रोज तुम्हारा यहीं इंतजार करूँगा। मैंने पूरी रेगिस्तान पार किया उस खजाने की तलाश में जो कहीं पिरामिडों के पास है और मेरे लिये कबीलों की लड़ाई मानो अभिशाप बन गई थी, मगर अब लगता है कि नहीं लड़ाई तो मेरे लिये वरदान थी, नहीं तो मैं तुमसे कैसे मिलता?”

“लड़ाई किसी दिन खत्म हो जाएगी, लड़की ने कहा।

लड़के ने चारों ओर खड़े खजूर के पेड़ों की तरफ देखा और खुद को याद दिलाया कि वह गड़रिया था और फिर से गड़रिया बन सकता है। फातिमा उसके लिये किसी भी खजाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

“कबीलेवाले हमेशा खजाने की तलाश में रहते हैं,” लड़की ने कहा, जैसे उस वक्त उसने अनुमान लगा लिया हो कि इस वक्त वह क्या सोच रहा था। और रेगिस्तान में रहने वाली औरतें अपने कबीले के आदमियों पर गर्व करती हैं।

उसने पानी भरा और वहाँ से चली गई।

लड़का हर रोज फातिमा से मिलने कुएँ पर जाता था। उसने लड़की को अपने गड़रिये जीवन के बारे में बताया। बूढ़े बादशाह और क्रिस्टल की दुकान के बारे में भी बताया। उन दोनों में दोस्ती हो गई। उन पंद्रह मिनटों को छोड़कर, जो वह फातिमा के साथ बिताता था, उसे लगता था कि पूरा दिन इतना लंबा हो गया है कि काटे नहीं कटता।

(पाओलो कोएलो की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक ‘अल्केमिस्ट’ से लिया गया प्रेम प्रसंग)

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