खुशी कहाँ छिपी होती है?- A Story

वॉचमैन रामशरण अकेला और लोगों की फरमाइशें अलग-अलग। कभी फाटक खोलने की कभी बंद करने की। आजकल एक काम और आया है, लोग जो फ्लैट में हैं खूब घूमने जा रहे हैं। रामशरण इधर आओ, सामान गाड़ी में रख दो। साहब कहीं जा रहे हैं? उसने पूछा। हाँ छुट्टी जो हुई हैं। कैम्पस से कोई-न-कोई सैर-सपाटे के लिये जाते रहते, कभी कोई उसे बख्शीश देता तो वह खुश हो जाता और कभी कोई भी गाड़ी में सामान रखवाकर चला जाता। एक दिन की बात है, जो उसके दिल में आ गई। एक और परिवार बाहर जाने के लिये निकले, रामशरण उठाने के लिये गया, उनके साथ एक छोटा बच्चा भी था। बच्चे ने फुदककर खुशी से रामशरण से कहा, तुम भी चलो घूमने। अरे बाबा मैं कहाँ जाऊंगा। सब चले गए तब रामशरण को उस बच्चे की कही हुई बात बार-बार याद आ रही था और वह सोच रहा था कि सभी के पास कितना पैसा है। मैं तो गरीब हूँ। कितना अच्छा होता, अगर मैं भी कहीं घूमने जाता। इसी तरह कई दिन बीत लेकिन वह बच्चे की बात को नहीं भूल पाया। एक दिन शाम होने से पहले उसकी ड्यूटी समाप्त होने पर वह घर न जाकर सामने के एक पेड़ के नीचे बैठ गया। उस पार्क में बहुत से बच्चे खेल रहे थे और खूब शोर मचा रहे थे पर उसे कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था। वह अपनी ही सोच में डूबा हुआ था। फिर बैठे-बैठे पॉकेट से एक कागज का टुकड़ा और पेन निकाला। उसने सुना था कि दुनिया गोल है। उसने कागज पर एक गोला बनाया, दुनिया बड़ी है न। फिर वह सोचने लगा कि वह कहाँ है,  पार्क कहाँ है? इस तरह उस गोले पर पेड़ सड़क बनते गए, फिर नदी, फिर उसे याद आया वे लोग पहाड़ों में घूमने गए हैं। पहाड़ भी तो बनाना है। पहाड़ तो बहुत ऊँचा होता है उसने अपने सिर को ऊँचा किया और ऊपर की ओर देखने लगा और ऊँचा देखने लगा क्योंकि पहाड़ तो बहुत ऊँचा होता है। ऐसा करते-करते वह पीछे की ओर उलट गया। उसे होश ही नहीं था कि उसके पीछे एक कुत्ता बैठा था। वह उलटकर उस कुत्ते पर जा गिरा। कुत्ता चिल्लाकर भाग गया। यह देखकर पास में खेल रहे बच्चे भी हंसने लगे। उन बच्चों को हंसता हुआ देखकर रामशरण के चेहरे पर भी एक अलग ही मुस्कान आ गई। रामशरण उन बच्चों के साथ खूब हंसा। रामशरण को अहसास हुआ कि खुशी पहाड़ पर नहीं बल्कि लोगों के आसपास होती है। इसी खुशी के साथ वह अपने घर को चला गया।

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