खोयी हुई घड़ी की खोज

एक गांव में एक किसान रहता था। उसके पास एक घड़ी थी जिसे वह हमेशा अपने हाथ में समय देखने के लिये बांधता था, लेकिन वह सोते समय वह घड़ी उतारकर सोता था। एक दिन सुबह उठकर जब उसने अपनी घड़ी पहननी चाही, लेकिन उसे अपनी घड़ी कहीं नहीं मिली। उसकी घड़ी कहीं खो गई थी।

घड़ी की कीमत ज्यादा न होने के बावजूद वह घड़ी उसे बहुत ही प्रिय थी क्योंकि उसकी भावनाएं उस घड़ी के साथ जुड़ी हुई थीं। इसीलिये वह हर हाल में चाहता था कि वह घड़ी उसे मिल जाए। उसने घड़ी ढूंढ़ने की बहुत प्रयास किया, घर के हर कमरे में देखा, बाड़े में देखा यहाँ तक की अनाज के ढेर में भी, मगर इतनी कोशिशों के बावजूद वह घड़ी उसे नहीं मिली। उसने बच्चों को इस काम में लगाने का तय किया क्योंकि वे अधिक फुर्तीले होते हैं।

उसने आसपास खेल रहे सभी बच्चों को आवाज लगाई और कहा, “बच्चों तुम में से जो कोई भी मेरी वह घड़ी मुझे ढूंढ़ कर ला देगा, तो मैं उसे 100 रुपये का इनाम दूंगा।”

इतना सुनते ही सभी बच्चे घड़ी को खोजने में लग गए। वे घर के कोने-कोने में देखने लगे। सभी जगह देखने के बाद भी वह घड़ी उन्हें नहीं मिली, इतनी सारी कोशिशें करने के कारण बच्चे अब थक चुके थे। किसान को यह अहसास हुआ कि शायद अब उसकी वह घड़ी अब कभी भी नहीं मिलेगी।

तभी एक लड़का उसके पास आया और बोला, “काका, मुझे एक और मौका दीजिये, लेकिन इस बार ये प्रयास में अकेला कर चाहूंगा।” किसान भी लड़के के आत्मविश्वास को देखते हुए, उसे एक और मौका देने के लिये मान गया। लड़का एक-एक करके घर के हर कमरे में जाता और फिर वह शयन कक्ष में से निकला तो किसान और सब बच्चों ने देखा कि उसके हाथ में घड़ी है, घड़ी उसे मिल चुकी थी। घड़ी देखकर किसान बहुत प्रसन्न हो गया।

लड़के से घड़ी लेते हुए किसान ने पूछा, “तुम्हें यह कैसे और कहाँ मिली। हमारे इतने प्रयासों के बावजूद हमें इसमें असफल रहे, फिर तुमने इसे कैसे ढूंढ़ निकाला?”

लड़के ने कहा, “मैंने कुछ अधिक नहीं किया, बस प्रत्येक कमरे में गया और वहाँ शांत बैठकर घड़ी की टिक-टिक की आवाज सुनने की कोशिश करने लगा। क्योंकि इस बार अकेले होने के कारण शोर-शराबा बिल्कुल भी नहीं था और जब मैं शयन कक्ष में गया, तब वहाँ थोड़ा-सा ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की, फिर मुझे घड़ी की टिक-टिक की आवाज सुनाई देने लगी। जिससे मैंने इसकी दिशा का अंदाजा लगाया और यह घड़ी, जो की उस बड़ी अलमारी के पीछे गिरी हुई थी, खोज निकाली।”

किसान लड़के की समझदारी और ध्यान देने की क्षमता से काफी प्रभावित हुआ। अंत में उस किसान ने अपना वादा निभाते हुए लड़के को इनाम के तौर पर 100 रुपये दे दिये।

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