जाओ और जाकर दरवाजा खोल दो- Miraslav Holub

दरवाजा

जाओ और जाकर दरवाजा खोल दो…

हो सकता है बाहर

खड़ा कोई दरख्त, या जंगल भी

या कोई बाग भी हो सकता है

हो सकता है कोई जादुई शहर ही खड़ा हो।

जाओ और जाकर दरवाजा खोल दो…

हो सकता है कोई कुत्ता धक्के मार रहा हो

कोई चेहरा भी दिखाई दे सकता है तुम्हें

संभव है सिर्फ आंख हो

कोई चित्र भी हो सकता है

किसी दूसरे चित्र से अवतरित होता हुआ…

जाओ और जाकर दरवाजा खोल दो…

बाहर यदि कोहरा जमा होगा तो

उसको छंटने का रास्ता मिल जाएगा।

जाओ और जाकर दरवाजा खोल दो…

यदि सिर्फ और सिर्फ

वहां अंधेरा ठहरा हुआ हो, तब भी

सूनी हवा सिर झुकाए खड़ी हो

तब भी

ये सब न हो…कहीं कुछ भी न हो

तब भी

जाओ और जाकर दरवाजा खोल दो।

और कुछ न भी हो

कम से कम

हवा का झोंका तो आर-पार होगा ही…

-Miraslav Holub

एक लड़के का सिर

इसमें है अंतरिक्ष यान

और पियानो का सबक सीखने से

बच निकलने की योजना

और वहां है

नूह की नाव

और वहां है

पूरी तरह एक नया ही ही लफ्ज

पूरी तरह एक नया ही खरगोश

पूरी तरह एक नया ही भंवरा

यह एक नदी है

जो ऊपर की तरफ बहती है

वहां एक पहाड़ है

वहां प्रति पदार्थ भी है

और इसे किसी तरह काटा-छांटा

नहीं जा सकता

मुझे यकीन है

कि जिसे काटा-छांटा नहीं जा सकता

वह बस, एक सिर है

इन हालात में

यही बहुत बड़ा भरोसा है

कि तमाम लोगों के पास सिर हैं

-Miraslav Holub

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