प्रेरणादायी कहानियाँ-2 – व्यर्थ की बातें

प्रेरणादायी कहानियाँ-3 –संघर्ष आवश्यक है।

प्रेरणादायी कहानियाँ-1- संगति का महत्व

एक बार सुकरात बाजार से गुजर रहे थे, तो रास्ते में उनकी एक मुलाकात एक परिचित व्यक्ति से हुई। उन सज्जन ने सुकरात को रोककर कुछ बताना शुरु किया।

वह कहने लगा कि क्या आप जानते हैं कि कल आपका मित्र आपके बारे में क्या कह रहा था?

सुकरात ने उस व्यक्ति की बात वहीं रोकते हुये कहा- “सुनो भले व्यक्ति मेरे मित्र में मेरे बारे में क्या कहा, यह बताने से पहले तुम मेरे तीन छोटे से प्रश्नों का उत्तर दो।”

उस व्यक्ति ने आश्चर्य से कहा– “तीन छोटे प्रश्न।”

सुकरात ने कहा- “हाँ, तीन छोटे प्रश्न।”

“पहला प्रश्न तो यह कि क्या तुम मुझे जो कुछ भी बताने जा रहे हो, वह पूरी तरह सही है।”

उस आदमी ने जबाव दिया- “नहीं मैंने अभी-अभी यह बात सुनी और…।”

सुकरात ने कहा- “कोई बात नहीं, इसका मतलब यह कि तुम्हें नहीं पता कि तुम जो कहने जा रहे हो, वह सच है या नहीं?”

“अब मेरे दूसरे प्रश्न का जबाव दो कि क्या जो कुछ तुम मुझे बताने जा रहे हो वह मेरे लिये सुनने में अच्छा है?”

आदमी ने तुरंत कहा- “नहीं बल्कि इसका ठीक उल्टा है।”

सुकरात बोले- “ठीक है अब मेरे आखिरी प्रश्न का जबाव दो कि जो कुछ तुम मुझे बताने जा रहे हो वह मेरे किसी काम का है भी या नहीं?”

व्यक्ति बोला- “नहीं उस बात में आपके काम आने जैसा तो कुछ नहीं है।”

तीनों प्रश्न पूछने के बाद सुकरात बोले- “ऐसी बात जो सच नहीं है, जिसमें मेरे बारे में कुछ भी अच्छा नहीं है, और जिसकी मेरे लिये कोई उपयोगिता नहीं है, उसे सुनने से क्या फायदा। और सुनो, ऐसी बातें करने से भी क्या फायदा।”

सीख- सुकरात हमें समझाते हैं कि संसार में जो अधिकतर बातों और वस्तुएँ जिनमें हम व्यस्त रहते हैं या कि स्वयं को लिप्त रखते हैं, वे सभी हमारे जीवन के लिये उतनी महत्वपूर्ण नहीं हैं जितना हम उन्हें समझते हैं। इसिलिए उन सभी बातों से दूर रहकर अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिये प्रयास करना चाहिये।