‘रिक्त-अरिक्त’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

रिक्त आकाश के रिक्त होने को,

अरिक्त पक्षियों ने बना दिया।

रिक्त-अरिक्तों के गूढ़ खेल को,

खेलने से मैंने तो मना किया।

वो जब जाएंगे उड़कर घरों में,

तब फिर से शून्य-सा हो जाएगा।

सब खेल खत्म हो जाएगा,

और, अरिक्तपन खिलाड़ी ले जाएगा।

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