‘कोरोना ! तुम क्यों आए भारत में?’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

कोरोना ! तुम क्यों आए भारत में?
वह भी होली के समय!
तुम्हें पता नहीं यहाँ रंग उड़ता है!
और यहाँ के लोग रंग से अधिक,
अब ये लोग तुमसे भी कहेंगे,
‘बुरा ना मानो होली है,’
पर तुम तो ठहरे परदेसी,
‘बुरा तो मान जाओगे’
खैर, अब तुम्हें जाना होगा,
वहाँ, जहाँ सब अंतत जाते हैं
यहाँ रहे तो ऐसी-वैसी हरकतें करोगे
क्योंकि पेय भाँग के बनाये जाते हैं,
तुम किसी जर्जर खंडहर की ईंटों,
या किसी गरीब की ख्वाहिशों तले
मर सकते हो और देख सकते हो
यहाँ तुम्हारे अलावा कई कारण
और हैं लोगों के पास, मरने के।

4 comments

  1. Ek saath bahut kuchh kah diyaa…….kataksh bhi…kya khub kaha……..aur bhi bahut se kaaran hain yahan marne ke ………..tum kyaa maroge……apko evam apke samast pariwar ko Holi ki hardik shubhkamnaye.

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    • आपको और आपके परिवार को भी होली की खूब-खूब शुभकामनाएँ…

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