प्रेरणादायी कहानियाँ-3 –संघर्ष आवश्यक है।

प्रेरणादायी कहानियाँ-2 – व्यर्थ की बातें

जीव विज्ञान के एक अध्यापक अपने शिष्यों को पढ़ा रहे थे कि सूँड़ी तितली में कैसे बदल जाती है। उन्होंने छात्रों को बताया कि कुछ ही घंटों में तितली अपने खोल से बाहर निकलने की कोशिश करेगी। उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि वे खोल से बाहर निकलने में तितली की मदद न करें। इतना कहकर वे कक्षा से बाहर चले गए।
छात्र इंतजार करते रहे।
तितली खोल से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी। कुछ देर तक तितली बाहर आने के लिये संघर्ष करती रही।
छात्रों को उस पर दया आ गई। अपने अध्यापक की सलाह न मान कर उसने खोल से बाहर निकलने में संघर्ष कर रही तितली की मदद करने का फैसला किया। उन्होंने खोल को तोड़ दिया, जिसकी वजह से तितली को बाहर निकलने के लिये और मेहनत नहीं करनी पड़ी। लेकिन वह थोड़ी ही देर में मर गई।
वापस लौटने पर शिक्षक सारी घटना मालूम हुई। तब उन्होंने छात्रों को बताया कि खोल से बाहर आने के लिये तितली को जो संघर्ष करना पड़ता है, उसी की वजह से उसके पंखों को मजबूती और शक्ति मिलती है।
यही प्रकृति का नियम है। तितली की मदद करके छात्र ने उसे संघर्ष करने का मौका नहीं दिया। और नतीजा यह हुआ कि वह मर गई।
अपनी जिंदगी पर भी यही उसुल लागु कीजिये। जिंदगी में कोई भी कीमती चीज बिना संघर्ष के नहीं मिलती।
माँ-बाप अपने बच्चों को शक्ति हासिल करने के लिये शक्ति हासिल करने का मौका ही नहीं देते। इस तरह वे जिन्हें सबसे अधिक चाहते हैं उन्हीं को नुकसान पहुँचा बैठते हैं।

कुल मिलाकर बात यह है कि माता-पिता अपने बच्चों को हमेशा खुश औऱ स्वस्थ देखना चाहते तो हैं, लेकिन उन्हें उस प्रक्रिया से गुजरने नहीं देते जिससे गुजरकर बच्चे अपनी सबसे ऊँची संभावना को हासिल कर जीवन को सार्थर बना सकें। वजह यह है कि उन माता-पिता ने भी कभी अपने जीवन के बारे में इस तरह नहीं सोचा, वे भी अपने चारों ओर बनायी गई एक आत्मसुरक्षा की दीवार में ही घिरे रहे।

कहते हैं, हर इंसान के अंदर दो बुनियादी चाहत या दो तीव्र इच्छाएं होती हैं, एक तो स्वयं की सुरक्षा, लोगों से, अपने विचारों, भावनाओं की और शारीरिक सुरक्षा ।

तो कृपया आप जो भी हैं जीवन को उसके सही रूप में जानने के लिये अपने ओर , चारों ओर कोई सीमाएं मत रखिये, जीवन को किसी तरह सार्थक बनाने का प्रयास करते रहिये।

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