‘सावधान! बच्चे उतर रहे हैं’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

नमस्कार मित्रों, यह कविता लिखने का विचार मरे मन में तब आया, जब मैं कहीं किसी काम से जा रहा था, और एक स्कूल बस गुजरती हुई गई, मैंने देखा, उस बस पर सभी स्कूल बसों की तरह लिखा हुआ था, सावधान बच्चे उतर रहे हैं, लेकिन अगर बस चल रही है, तो बच्चे कैसे उतर सकते हैं, बल्कि बच्चे तो बहुत ही खुशी से बस में बैठकर बातों कर रहे थे, खेल रहे थे, हँस रहे थे आदि-आदि।

मुझे यह बड़ा अजीब लगा, इसीलिये इस घटना को मैंने एक कविता का रूप दिया है। मैं आशा करता हूँ अगर आपको यह रचना औऱ यह प्रयास पसंद आएगा तो जरूर बताएंगे, और तब भी बताएंगे, जब यह कविता तर्कसंगत न लगे या इसमें किसी तरह का विरोधाभास हो। आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

सावधान! बच्चे उतर रहे हैं।

सजग तो मैं हूँ ही, लेकिन
चलती जा रही इस बस से,
केवल वायु के तीव्र झोंके लड़ रहे हैं।
बच्चे कहाँ उतर रहे हैं?

अंधा मैं हो गया हूँ, या,
इतनी प्रगति तुमने पा ली,
कि बच्चे अदृश्य फिर रहे हैं!
बच्चे कहाँ उतर रहे हैं?

सैकड़ोंं दफा रुका, देखकर, किन्तु,
मुझे तो वे, हँसी-ठिठोली के विस्तृत,
उन्मुक्त, गगन में विहरते दिख रहे हैं।
बच्चे कहाँ उतर रहे हैं?

जीवन में होकर, जीवन से अनजान,
स्वयं के ही, अज्ञात यात्रा के सागर में,
मानो वे, हंसों के समान तिर रहे हैं>
बच्चे कहाँ उतर रहे हैं?

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