ईश्वर करे! हम हँसे, हसाएँ

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें,
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये।

-निदा फाजली

कहते हैं कि जब हम हँसते हैं, तो हम ईश्वर की प्रार्थना कर रहे होते हैं, किंतु ज हम किसी को हँसाते हैं, तो ईश्वर हमारे लिये प्रार्थना कर रहा होता है। हँसना और हँसाना जीवन की खुशियों का आनंद उठाने का, सबसे आसान तरीका है।
आज का दौर जिस तेजी के साथ बदल रहा है, उसमें हमारी हँसी कहीं खो गयी है। छोटी-छोटी बातों में भी हमें हँसी खोजनी चाहिये, चूँकि अगर अभी नहीं हँसेंगे तो कब?

बहुत-से लोग हँसने की सहज क्रिया को, व्यायाम की तरह करते हैं। वे इसे लाफिंग एक्सरसाइज कहते हैं, जबकि यह तो जिंदगी का एक साधारण किंतु सुंदर हिस्सा है। यकीनन हम हँसने को व्यायाम कह सकते हैं, लेकिन इसे केवल लाफिंग एक्सरसाइज कहकर ही सुबह के नियत पंद्रह मिनटों तक सीमित कर देना एक पागलपन व मूर्खता की निशानी है।

विपरीत परिस्थितियों में भी हमें हँसना चाहिये, उन समस्याओं पर हँसना चाहिये जो हमारे जीवन का काफी समय हमें चिंताओं के ही गहरे चिंतन में बर्बाद करके हमें इस मानसिक रूप से अभ्यस्त बना देती हैं। कोई भी समस्या जीवन से बड़ी नहीं हो सकती।

हँसी आपको बाजारों में मिल सकती है, चौराहों पर मिल सकती है, मन्दिरों में मिल सकती है, जैसे मुझे मिली थी- ‘यह हँसी, यह खुशी

तो इस लेख को पढ़ने के बाद कम-से-कम एक मुस्कान तो आपके होठों पर आ जानी चाहिये, जो आपके चेहरे को और अधिक सुंदर बनाएगी…

…जी ऐसे ही…वाह ! आप बहुत सुंदर लग रहे हैं…धन्यवाद।

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