Chandrakanta Book Review In hindi

Chandrakanta Novel by Devkinandan Khatri, Book Review in Hindi

चंद्रकांता उपन्यास की समीक्षा

Chandrakanta Book Review in Hindi

बाबू देवकीनंदन खत्री का यह उपन्यास लंबे समय से हिंदी साहित्य के पाठक बड़े चाव से पढ़ते आ रहे हैं। अपना पहला उपन्यास होने के बावजूद लेखक ने चंद्रकांता को बेहद रोचक ढंग से रचा। चार भागों में विभक्त यह उपन्यास अपनी कथा बयानों में कहता है। लेखक कहते हैं कि यह एक शुद्ध लौकिक प्रेम कहानी है, किंतु इसका कथानक प्रेम आदि भावनाओं से कम, बल्कि आश्चर्य, विस्मय, रहस्यों आदि से अधिक लबरेज हैं। लेकिन तब भी इस कथा का आधार नायक-नायिका का परस्पर प्रेम ही है। यह विरोधभास प्रतीत हो सकता है।

उपन्यास की भाषा किसी सामान्य व्यक्ति के भी समझ में आसानी से आ जाने वाली है, किंतु उपन्यास में जगह-जगह उन्होंने यह भी दर्शा दिया है कि वे इससे उलट भाषा शैली, जोकि पढ़ने व समझने में कुछ कठिन होती है, का भी प्रयोग कर सकते थे।

संभवत इस कारण से कि पाठक को इस रोचक कहानी को पढ़ने में कठिन हिंदी शब्दों के उच्चारण व अर्थ की वजह से असुविधा न हो, उन्होंने उस भाषा शैली का प्रयोग नहीं किया।

चंद्रकांता उपन्यास एक स्वतंत्र उपन्यास हैं। जबकि देवकीनंदन खत्री के अन्य उपन्यास किसी औपन्यासिक श्रृंखला के भाग हैं। उनकी चंद्रकांता संतति नाम कीऔपन्यासिक श्रृंखला बहुत प्रसिद्ध हैं।

लेखक के इन रोचक व आश्चर्यजनक उपन्यासों पर टीवी सीरियल भी तैयार किये जा चुके हैं, जो दर्शकों में काफी लोकप्रिय रहे, किंतु पुस्तक को पढ़ने से अधिक आनंद उन घटनाओं को पर्दों पर देखने में नहीं आता, जितना कि उनकी मस्तिष्क में कल्पना कर देखने में आता है।

उपन्यास को अच्छे ढंग से पढ़ने व आनंद उठाने के लिये पाठक की कल्पनाशक्ति सामान्य स्तर से कुछ ऊपर चाहिए, चूँकि उपन्यासकार ने उपन्यास में विभिन्न प्राकृतिक स्थलों का होनी सजीव चित्रण किया हैं। मुख्य रूप से पहाडियों, खोहों, नदियों, जंगलों, महलों, खंडहरों आदि का इस उपन्यास की भाषा में इतना सुंदर वर्णन किया है कि ये स्थल हमारे दृष्टि पटल पर जीवित हो उठते हैं।

तिलिस्म को तोड़ने तथा ऐयारी के फन से युद्ध पलटने, हुलिया बदलने, बेहोश करने आदि कठिन कार्यों को भी चुटकियों में अंजाम देने वाले ऐयारों की विस्मयपूर्ण कहानी से बँधा यह उपन्यास हिंदी साहित्य के विस्तृत आकाश का जगमगाता सितारा है।

आइये कुछ बातें जानते हैं, जो इस उपन्यास को पठन सुविधापूर्ण बनाएंगी-

तिलिस्म क्या होता है?

उपन्यास में तिलिस्म के संबंध में लिखा है कि तिलिस्म वही शख्श तैयार करता है जिसके पास बहुत माल-खजाना हो, किंतु कोई वारिस न हो। पुराने जमाने के राजाओं को जब तिलिस्म बाँधने की जरूरत पड़ती थी तो बड़े-बड़े ज्योतिषी, नजूमी, वैद्य, कारीगर और तांत्रिक लोग इकट्ठे किये जाते थे। उन्हीं लोगों के कहे मुताबिक तिलिस्म बाँधने के लिये जमीन खोदी जाती थी, उसी जमीन के अन्दर खजाना रखकर तिलिस्मी इमारत बनाई जाती थी। उसमें ज्योतिषी, नजूमी, वैद्य, कारीगर और तांत्रिक लोग अपनी ताकत के मुताबिक उसके छिपाने की बन्दिश करते थे। मगर इसके साथ ही उस आदमी के नक्षत्र और ग्रहों का भी ख्याल रखते थे, जिसके लिये वह खजाना रखा जाता था।

ऐयार कौन होते हैं?

ऐयार शब्द अरबी भाषा का है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है, धूर्त अथवा वेश या रूप बदलकर अनोखे काम करने वाला व्यक्ति। ऐयार उसको कहते हैं जो हर एक फन जानता हो, शक्ल बदलना औऱ दौड़ना उसके मुख्य काम हैं। ऐयारों के संबंध में खत्री जी ने चंद्रकांता की भूमिका में लिखा है- राजदरबार में ऐयार भी नौकर होते थे जो कि हरफन मौला, यानी सूरत बदलना, बहुत-सी दवाओं का जानना, गाना-बजाना, दौड़ना, अस्त्र चलाना, जासूसों का काम करना, वगैरह बहुत-सी बातें जाना करते थे। जब राजाओं में लड़ाई होती थी तो ये लोग अपनी चालाकी से बिना खून बहाये व पलटनों की जानें गंवाये लड़ाई खत्म करा देते थे।

लेखक के बारे में-

बाबू देवकीनंदन खत्री का जन्म 18 जून सन् 1861 को, बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हुआ था। देवकीनंदन जी का उस समय के काशी नरेश के साथ बहुत अच्छे संबंध थे। इस संबंध के आधार पर उन्होंने चकिया व नौगढ़ के जंगलों के ठेके लिये। वे बचपन से ही घूमने-फिरने व यात्राओं के बेहद शौकीन थे। ठेकेदारी के काम से पर्याप्त आय होने के साथ-साथ वे अपने सैर-सपाटे के शौक को भी पूरा करते रहते थे। अपने इस सैर-सपाटों में वे कई-कई दिनों तक चकिया एवं नौगढ़ के बीहड़ जंगलों, पहाड़ियों और ऐतिहासिक इमारतों के खंडहरों की खाक छानते रहते थे। कुछ समय बाद जब उनसे जंगलों के ठेके छिन गये तब इन्हीं जंगलों, पहाड़ियों और ऐतिहासिक इमारतों के खंडहरों की पृष्ठभूमि में अपनी तिलिस्म तथा ऐयारी के कारनामों की कल्पनाओं को मिश्रित कर उन्होंने चन्द्रकान्ता उपन्यास की रचना की।

उन्होंने चंद्रकांता व चंद्रकांता संतति के अलावा काजर की कोठरी, नरेंद्र-मोहिनी, कुसुम कुमारी, वीरेंद्र वीर, गुप्त गोदना, कटोरा भर, भूतनाथ जैसी रचनाएं भी कीं। ‘भूतनाथ’ को उनके पुत्र दुर्गा प्रसाद खत्री ने पूरा किया। गौरतलब बात यह है कि देवकीनंदन खत्री ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को अविस्मरणीय गति दी। इस संबंध में यह भी कहा जाता है कि अनेक गैर-हिंदीभाषी व उर्दुंदा लोगों ने इन उपन्यासों को पढ़ने के लिये हिंदी सीखी। यकीनन इस उपन्यास और इसकी कथा ने सभी पाठक लोगों का मन में अपने लिये स्थान बना लिया।

चंद्रकांता उपन्यास को अमेजन पर देखें- Buy Chandrakanta from Amazon

निष्कर्ष-

निष्कर्ष के तौर पर केवल यही कहना चाहूंगा कि यदि आप Adventures खोजते रहते हैं, कुछ नया, रोचक पढ़ने के शौकीन हैं, उपन्यासों में रुचि रखते हैं तो बाबू देवकी नंदन खत्री द्वारा रचित चंद्रकांता नामक उपन्यास को पढ़ने का सुझाव मैं आपको व्यक्तिगत तौर पर देता हूँ।

नीचे दिये बटन पर भी क्लिक करके आप चंद्रकांता को Amazon.in से खरीद सकते हैं।

यदि आप इसे पढ़ चुके हैं तो टिप्पणी में इसके बारे में अपने विचार भी जरूर बताएं। आशा करता हूँ कि आपको यह समीक्षा अच्छी लगी होगी।
धन्यवाद।

संदर्भ- देवकीनन्दन खत्री- विकिपीडिया 

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s