मेरा देश क्या कुछ नहीं सहता- हिंदी कविता- PAMIT Hindi Poems

मेरा देश क्या कुछ नहीं सहता,
पर हाँ वह किसी नहीं कहता।

वह सहता है आघात-प्रतिघात,
हमारे नैतिक, अनैतिक , राजनीतिक।

वह सहता है चालें दुश्मन की,
जो मिटाना चाहतीं आधार, सांस्कृतिक।

वह सहता है असभ्य वाणियों को,
और संकल्प से हीन हम प्राणियों को।

वह सहता है समय-समय पर,
होने वाले बम विस्फोटों को,

जाने कैसे चुप रह जाता है
सह-सह कर विराट चोटों को

और फिर अपने भवन में ही वह,
क्षण-क्षण पर अत्याचार सहता है

कहने की जरूरत तो नहीं पर देश,
अपनी बेटियों का बलात्कार सहता है।

उसे संदेह है कि इस देश में,
कोई जीवित व्यक्ति भी रहता है!

इन सबको सहने के बाद भी,
मेरा देश, मेरा मौन सहता है!

देश, तू सच में है महान, वरना,
मेरी कविताएं कौन सहता है?

-PAMIT Hindi

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