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पढ़ो ऐसे कि जैसे तुम्हें सदा जीना है,

जियो ऐसे कि जैसे तुम्हें आज ही दुनिया से चले जाना है…

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‘अंधेरी कोठरियों से बात’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poetry

जब पहुँचा वहाँ तब अंधेरा देखा,
मैंने कोठरियों में कुछ नहीं देखा,
तम की रेखायें ही थीं,
अलग-अलग आयामों में,
उनका इतिहास बँटा होगा,
कई-कई, कई नामों में,…

‘उठ मेरी बेटी सुबह हो गई’- हिंदी कविता- ‘सर्वेश्वर दयाल सक्सेना’- Hindi Poetry

तेरे साथ थककर
सोई थी जो तेरी सहेली हवा,
जाने किस झरने में नहा के आ गई है,
गीले हाथों से छू रही है तेरी तस्वीरों की किताब……

‘यह हँसी, यह खुशी’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

यह हँसी, यह खुशी, चौराहे पर जाती मिली, कि चार दोस्त, एक साइकिल पर, मूँगफली लेने आये, दस रुपये की। यह ठहाके, यह कहकहे, बाजार में होते दिखे, कि नई खुली उस दुकान से, वह महिला खरीद चुकी है, अपना दुपट्टा कई दफे। यह कारनामे, यह वाकये, मंदिरों में होते दिखे, कि नारायण को समझाकर […]

‘चमत्कार’- हिंदी कविता- ‘अमृता प्रीतम’

ये भगवानों का देश है यहाँ सिर्फ चमत्कार होता है पसीना कितना भी बहा लो उसकी मर्ज़ी के बिना सब बेकार होता है अब देखो न किसान कितना भी अन्न उगा ले गरीबी ही झेलता है पर उसी अन्न को घर घर बेचने वाला रुपयों में खेलता है मज़दूर कितना भी पसीना बहा ले मज़बूर […]

‘चुप-चाप’- हिंदी कविता- ‘अज्ञेय’

चुप-चाप चुप-चाप झरने का स्वर हम में भर जाए, चुप-चाप चुप-चाप शरद की चांदनी, झील की लहरों पर तिर आए, चुप-चाप चुप चाप जीवन का रहस्य, जो कहा न जाए, हमारी, ठहरी आँख में गहराए, चुप-चाप चुप-चाप हम पुलकित विराट में डूबें, पर विराट हम में मिल जाए… चुप-चाप चुप-चाऽऽप…

‘सब तुम्हारा ही है’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

मेरी कश्ती में है हौसला बहुत, कि उससे मिलने को बेक़रार, किनारा भी है कई सपने मेरे, इस सपने तले,टूटकर चूर हुए है,अब तुम जान ही लो,यह शख्स हत्यारा भी है महलों में रहता हूँ तो क्या, मन के किसी कोने में, एक खुश बंजारा भी है अधिक समेटो मत ख़ुशियाँ जहां की, सारे जहाँ […]

तब तब तृप्त हुआ हूँ- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

जब-जब उसने कांधे पर रखकर, हाथ, कोई बात पूछी, या समय बिताने को ही बस, उसे कोई पहेली सूझी, या उसकी फूँक की हवा से मेरी, कोई चोट ठीक हुई है। तब तब तृप्त हुआ हूँ। जब-जब बच्चों के अनगढ़ मन के साथ उत्साह से खेला हूँ, या, जब किसी बच्चे का दोस्त बना, जिसने […]

गाँव माटी दूर तो है छोड़ आये- एक प्रवासी मजदूर का गीत

गाँव माटी दूर तो है छोड़ आये,घर में भूखे, भात लाने दूर आये। मोतियों से आँसू रोती अम्मा मेरी,जाने कैसे मुन्ना मेरा रात खाए।शहर में हम बे-सहारे, गाँव मेरा घर पुकारे,कल क्या होगा, सोचता दिल थम-सा जाता रे,ये बीमारी जान लेती, काम छूटे, घर उजाड़े,ये गरीबी, हम जो जीते, कम है क्या रे। गाँव माटी […]

‘आवाजाही’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

आवाजाही, साँसों की निरंतर चलती रहे, बस इसलिये कदमों की, बंद करनी पड़ी।आवाजाही, धड़कनों की नियमित रहे, बस इसलिये उद्योगों की, प्रबंधित करनी पड़ी।कुछ सोच रहे, कुछ, लोगों के लिये ही, क्यों ?हमें रफ्तार विकास की, मंद करनी पड़ी।स्वयं को रखकर, उनकी जगह, सोचेंगे तो, इतना कांप उठेंगे, कि रस्सियाँ भी स्वरूप बदल डराएंगी, और, […]

अतुलनाय कृति है गुनाहों का देवता

अतुलनाय कृति है गुनाहों का देवता, मार्मिकता का, भावुकता का भंडार। आपने अवश्य पढ़ी होगी, अगर नहीं तो इसे पढ़ना ही चाहिये। यह इस पुस्तक की समीक्षा नहीं है, यह तो बस मेरे मन की भावनाएं जो इसे पढ़ने के बाद उपजी हैं, वह हैं, इस उपन्यास की समीक्षा के लायक भी मैं नहीं।आज सुबह […]

जलते दिये से जब ये पूछा कि

जलते दिये से जब ये पूछा कि ‘क्या ख्याल है तुम्हारा सूरज के बारे में,’ हँसा वह, बहुत हँसा हवा संग बहने लगा, साथ रख अपनी काया का,वापस आ कहने लगा,“एक दिया है वह भी”‘क्या एक दिया है सूरज!’ “हाँ एक दिया है, है लेकिन, विशाल, आधारहीन, कायारहित, इस अखिल ब्रह्मांड के, अंधकार की प्रचंडता […]

‘जीवन का हुलिया’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

दोस्तों, मुझे आपके अच्छे-बुरे-सुडौल-बेडौल-आसान-गूढ़, सभी प्रकार के कमेंट का इंतजार रहेगा। ‘मैंने हुलिया कहा था जीवन का मित्र! यह तुम क्या बना लाये हो लगता है किसी कागज पर केवल सादा-सा प्रकाश उतार लाये हो’, लाल-नीला-हरा-पीला, सब ही अनुपस्थित कोई न मिला तो श्वेत कर लाये हो, “श्वेत ही स्रोत है सब रंगों का, बाकी […]

‘एक छोटा जीव’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

एक छोटा जीव मानवों के सामने फैला रहा अपना बड़ा मुख और निगल रहा सब लोगों को, चाहे वे भिक्षुक या सिकंदर हों प्रकृति की तरकीब है शायद समझाने की कोई बात, जो हम सब लिख-पढ़ रहे किंतु जाने नहीं हो न पाया अनुभव हम जानते थे विज्ञान सूक्ष्म तरंगों कै, कणों का और जीवों […]

‘जीवन-परिधि से तुम दूर रही हो’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

अति न होगी गर कहूँ मेरे शब्द-शब्द में तुम भरपूर रही हो, जीवन ही होतीं मेरा, मगर जीवन-परिधि से तुम दूर रही हो। भाग्य रेखाओं में तो ना मिलीं पर इस चक्र के पार भी एक जहां है, तुम आना, मैं चलता हूँ, मैंने गुरु से पूछ लिया, द्वार कहाँ है! सब प्रकार की विक्षिप्तता […]

यदि राम सा संघर्ष हो- कविता- कवि संदीप द्विवेदी

सह ली सारी यातना, पर, कर्तव्य सर्वोपरि रखात्याग, शील, संकल्प को,जिस तरह जीवित रखाबोलो, कहाँ तक टिक सकोगे ?यदि राम सा संघर्ष हो। कल मुकुट जिस पर साजना था, अब उसे सबकुछ त्यागना थानिर्णयों के द्वन्द से,एक बालपन का सामना थावचन भी था थामना, आदेश भी था मानना, इस द्वंद में सोचो स्वयं को, धर्म […]

प्राणी वही प्राणी है- हिंदी कविता- भवानी प्रसाद मिश्र

तापित को स्निग्ध करे,प्यासे को चैन दे। सूखे हुए अधरों को, फिर से जो बैन दे।ऐसा सभी पानी है। लहरों के आने पर,काई-सा फटे नहीं।रोटी के लालच में,तोते-सा रटे नहीं। प्राणी वही प्राणी है। लँगड़े को पाँव औरलूले को हाथ दे।सत की संभार में,मरने तक साथ दे।बोले तो हमेशा सच,सच से हटे नहीं,।झूट के डराए […]

‘मैं सिक्कों में बिकना चाहता हूँ’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

मैं सिक्कों में बिकना चाहता हूँ, ताकि बच्चे भी खरीद सकें, और पा सकें वृद्ध भी, बिना नुकसान के डर के,ले सकें मेरे मन को, तपते सूरज की धूप जैसे, अपने शरीर पर ऊर्जा की तरह, ले सकें मेरे मन को,राधाकृष्ण के महारास की, उस शीतल पूर्णिमा की तरह।मैं समेटकर उन सिक्कों को, फिर उन […]

‘मैं कविता लिखूँ गर’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

मैं कविता लिखूँ गर,तो किस पर लिखूँ। सूरज, क्या तुम पर लिखूँ,नहीं! तुम क्रोधित हो जाओगे,मुझे राख बना दोगे। चाँद, क्या तुम पर लिखूँ,नहीं! तुम्हारी चमक ही उधार हैतुम मुझे क्या दोगे! वृक्षों क्या तुम पर लिखूँ,नहीं! मानव की क्रूरता से मिटे हुए होअब और भार कितना सहोगे! पंछियों क्या तुम पर लिखूँनहीं! शायद तलाशते […]

कालिदास ओ कालिदास-(कविता)-बाबा नागार्जुन

कालिदास ओ कालिदासकालिदास ओ कालिदासकालिदास ओ कालिदासकालिदास! सच-सच बतलानाइन्दुमती के मृत्युशोक सेअज रोया या तुम रोये थे?कालिदास! सच-सच बतलाना! शिवजी की तीसरी आँख सेनिकली हुई महाज्वाला मेंघृत-मिश्रित सूखी समिधा-समकामदेव जब भस्म हो गयारति का क्रंदन सुन आँसू सेतुमने ही तो दृग धोये थेकालिदास! सच-सच बतलानारति रोयी या तुम रोये थे? वर्षा ऋतु की स्निग्ध भूमिकाप्रथम […]

‘धूप मीठी लगी’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

तुम्हें चलते हुए देखा, उस रोज दोपहर में, और छा गय़ी शांति, मेरे सारे शहर में।केवल जो बातें बोलीं तुमने, वह ही मुझे खट्टी लगीं,उस रोज दोपहर की,धूप मीठी लगी। सतरंगी परिधान में थी, तुम मानो आसमान में थी, नेत्रों में मैं डूब गया, पाया नहीं तुम्हें,यूँ लगा स्वयं के ही ध्यान में थींकेवल वह […]

‘बस इस सदी की ही बात है’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

बस इस सदी की ही बात है,फिर ये पंछी चहचहाएंगे नहीं,करना कोशिशें लाख मनाने की,वे तुमसे मिलने आएंगे नहीं। बस इस सदी की ही बात है,उलझा लो पतंगों को पेड़ पर, बाद में वे तुम्हें रुलाएंगे नहीं,और, रक्षा सूत्र भी कलाई पर बँधाएंगे नहीं। बस इस सदी की ही बात है,जलमग्न नहीं, अश्रुमग्न संसार हो […]

एक प्रेम कहानी- ‘इलेवन मिनट्स’ से उदधृत

मित्रों, प्रस्तुत कहानी पाओलो कोएल्हो की एक प्रसिद्ध पुस्तक या एक कठिन उपन्यास Eleven Minutes से ली गई हैं। यह कहानी प्रेम का सही अर्थ को समझाने की कोशिश करती हैं। आशा है आप इसे पढ़कर अपने विचार कमेंट करेंगे। धन्यवाद। एक बार की बात है, एक पक्षी था। वह दो श्रेष्ठ पंख थे, आलीशान, […]

‘गर प्रसिद्धी पानी है तो’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

तुम्हें गर प्रसिद्धी पानी है तो, राजनीतिक मसलों पर बोलो। अपनी बात रखो, चाहे जबरदस्ती,हो सके तो इनको नापो तोलो। एक बात कहकर उसे भूल जाने का, अभ्यास करते रहो निरंतर। सिखलाओ तुम ना आता हो तब भी, नैतिक, अनैतिक का अन्तर। वह ‘धी’ बनो जो और प्रचंड करती आग को, सर्पों का दिन हो […]

‘अब डर नहीं है’ (There is no fear now)- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

चाँद-तारों के खो जाने का डर नहीं है,मुझे सूरज के उतर आने का डर नहीं है,यह लम्हा गुजरना ही है, गुजर जाएगा,मुझे इसके गुजर जाने का डर नहीं है।उस पर अधिकार नहीं, उसकी भी सत्ता है,मुझे उसके मुकर जाने का डर नहीं हैअनेक ख्यालों से इतना गुजर चुका,अब कोई ख्याल आने का डर नहीं हैस्वयं […]

पास में बैठो, मोहब्बत की महक देते रहो- POEM BY SATYAPAL SATYAM

पास में बैठो, मोहब्बत की महक देते रहो ,किसी अंधेरे में इन आँखों को चमक देते रहो। धूप में झुलसे ना मेरी प्रीत की हरियालियाँ सूख ना जाये कहीं, तरुवर की गीली डालियाँ सींचते जाओ टहनियों को, लचक देते रहो। पास में बैठो मोहब्बत की महक देते रहो, किसी अंधेरे में इन आँखों को चमक देते रहो। नफ़रतों के […]

‘केवल तुक मिलाए-2’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

केवल तुक मिलाए-1 कलम की स्याही सघन है, रुक-रुक के चलती पवन है, हर शुरुआत अ-धुरी रही है, खुद से मेरी बहुत दूरी रही है। दिशाएँ सब धुँधली हैं, आकाश में अब भी बदली हैं, दिन तो हो गया है, ‘दिनकर’ छिपा हुआ है। दीवार की ओट में छिपकर बैठा है, वहाँ कोई और नहीं, […]

‘और, फिर एक यहाँ से कविता निकलेगी’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

चाँद का आकार दिनोंदिन बदलता जा रहा है, सूरज का स्वभाव भी परवान चढ़ता जा रहा है, रोशनी इधर-उधर बादलों की इच्छा से टहलेगी, और, फिर एक यहाँ से कविता निकलेगी। सत्ताधीश हों या बंजारे यहाँ, भूख दोनों की बढ़ती जाएगी, एक जीवन की ही आस, अब रेत की तरह फिसलती जाएगी, हवा तूफान बन […]

‘अंतराल’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

कई दिनों बाद आया है,एक अंतराल।मानो निकलेगा, कोई गहन उजाला,जैसे फैलती, ज्वालामुखी की ज्वाला।हो जाएंगे राख, इधर-उधर,फैले हुए, ठहराव या कंकड-पत्थर।कितना समय माँगेगा मुझसे,यह अंतराल,और कितना मैं दे पाऊंगा इसे,किसी अज्ञात समय, जरूर होगा,समाप्त, यह अंतराल।

‘सावधान! बच्चे उतर रहे हैं’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

नमस्कार मित्रों, यह कविता लिखने का विचार मरे मन में तब आया, जब मैं कहीं किसी काम से जा रहा था, और एक स्कूल बस गुजरती हुई गई, मैंने देखा, उस बस पर सभी स्कूल बसों की तरह लिखा हुआ था, सावधान बच्चे उतर रहे हैं, लेकिन अगर बस चल रही है, तो बच्चे कैसे […]

लक्ष्य- हिंदी कविता- अमृता प्रीतम

वो बेटा था बड़ी उलझनें थी विकल्प जो इतने थे जैसे डॉक्टर इंजीनियर साइंटिस्ट इत्यादि और वो बेटी थी कोई उलझन नहीं थी क्योंकि कोई विकल्प ही नहीं था बस लक्ष्य था एकमात्र अच्छा वर।

PREDICTION OF CORONA VIRUS YEARS BEFORE (in Hindi)

आइए आपको उन दो किताबों के बारे में बताते हैं, जिनमें आज चीन के वुहान प्रांत से फैलकर पूरी दुनिया में पहुँचे कोरोनावायरस के बारे में बताया गया था। पहली किताब 1981 में पब्लिश हुई थी, किताब का नाम था “The Eyes of Darkness”, इसमें लेखक ने लिखा है सन 2020 में वुहान-400 नाम का एक वायरस वुहान […]

कितनी माताएँ?- Akbar Birbal Story

एक बार अकबर-बीरबल हमेशा की तरह टहलने जा रहे थे। रास्ते में एक तुलसी का पौधा दिखा तो मंत्री बीरबल ने झुककर प्रणाम किया। अकबर ने पूछा- कौन है ये? बीरबल- ये मेरी माता हैं। अकबर ने तुलसी के झाड़ को उखाड़कर फेंक दिया और बोला- ‘कितनी माता हैं तुम लोगों की?’ बीरबल को उसका […]

‘शिक्षा’-आदम की डायरी(‘अज्ञेय’ का कहानी संचयन)

गुरु थोड़ी देर चुपचाप वत्सल दृष्टि में नवागन्तुक की ओर देखते रहे। फिर उन्होंने मृदु स्वर में कहा, ‘‘वत्स, तुम मेरे पास आये हो, इसे मैं तुम्हारी कृपा ही मानता हूँ। जिनके द्वारा तुम भेजे गये हो उनका तो मुझ पर अनुग्रह है ही कि उन्होंने मुझे इस योग्य समझा कि मैं तुम्हें कुछ सिखा […]

प्रेरणादायी कहानियाँ-3 –संघर्ष आवश्यक है।

प्रेरणादायी कहानियाँ-2 – व्यर्थ की बातें जीव विज्ञान के एक अध्यापक अपने शिष्यों को पढ़ा रहे थे कि सूँड़ी तितली में कैसे बदल जाती है। उन्होंने छात्रों को बताया कि कुछ ही घंटों में तितली अपने खोल से बाहर निकलने की कोशिश करेगी। उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि वे खोल से बाहर निकलने में […]

‘खोजना होगा, तो खोज ही लूंगा’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

खोजना होगा तो खोज ही लूंगा,चाहे कितनी परतों में छिपा हो,कोई मेरा, या सबका वह।चलना होगा तो चल ही लूंगा,चाहे कितने ही पत्थर वजह,बनें मेरे रक्त के बहने की।देखना होगा तो देख ही लूंगा,चाहे प्रकाश विलीन हो जाए कहीं,और तम का ही हो क्षितिज।जानना होगा तो जान ही लूंगा,चाहे दोहराव करना पड़े जीवन का।और मिलना […]

‘कोरोना ! तुम क्यों आए भारत में?’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

कोरोना ! तुम क्यों आए भारत में?वह भी होली के समय!तुम्हें पता नहीं यहाँ रंग उड़ता है!और यहाँ के लोग रंग से अधिक,अब ये लोग तुमसे भी कहेंगे,‘बुरा ना मानो होली है,’पर तुम तो ठहरे परदेसी,‘बुरा तो मान जाओगे’खैर, अब तुम्हें जाना होगा,वहाँ, जहाँ सब अंतत जाते हैंयहाँ रहे तो ऐसी-वैसी हरकतें करोगेक्योंकि पेय भाँग […]

नारी! तुम केवल श्रद्धा हो

“क्या कहती हो ठहरो नारी!संकल्प अश्रु-जल-से-अपने।तुम दान कर चुकी पहले हीजीवन के सोने-से सपने। नारी! तुम केवल श्रद्धा होविश्वास-रजत-नग पगतल में।पीयूष-स्रोत-सी बहा करोजीवन के सुंदर समतल में। देवों की विजय, दानवों कीहारों का होता-युद्ध रहा।संघर्ष सदा उर-अंतर में जीवितरह नित्य-विरूद्ध रहा। आँसू से भींगे अंचल परमन का सब कुछ रखना होगा-तुमको अपनी स्मित रेखा सेयह […]

मैं भाव सूची- poem by KUMAR Vishwas

मैं भाव सूची उन भावों की जो बिक़े सदा ही बिन तोले,तन्हाई हूँ हर उस ख़त की,जो पढ़ा गया है बिन खोले।हर आंसू को हर पत्थर तक पहुँचाने की लाचार हूक,मैं सहज अर्थ उन शब्दों का,जो सुने गए हैं बिन बोले,जो कभी नहीं बरसा खुल कर,हर उस बादल का पानी हूँ। लव-कुश की पीर बिना […]

‘उड़ने वाली झाडू’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

झाडू है एक मेरे घर में, लेकिन उड़ने वाली नहीं, यह मुझे पता चला तब उस समय जब की कोशिश, झाडू से पहली बार उड़ने की, हाँ, उड़ा मैं, कुछ क्षणों तक तो कि क्या पता, इंजन खराब हुआ या फ्यूल गुल हो गया! इससे पहले कुछ समझ पाता, मैं प्यारी धरती से जा मिला।

तुम आईं- हिंदी कविता- केदारनाथ सिंह

तुम आईंजैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रसजैसे चलते-चलते एड़ी मेंकांटा जाए धंसतुम दिखींजैसे कोई बच्चा सुन रहा हो कहानीतुम हंसीं जैसे तट पर बजता हो पानीतुम हिलींजैसे हिलती है पत्तीजैसे लालटेन के शीशे में काँपती हो बत्तीतुमने छुआजैसे धूप में धीरे-धीरे उड़ता है भुआ और अंत में जैसे हवा पकाती है गेहूं के खेतों […]

‘जब मैंने पहली निजी पुस्तक ख़रीदी’ -डॉ. धर्मवीर भारती

लाइब्रेरी खुलते ही पहुँच जाता और जब लाइब्रेरियन शुक्ल जी कहते कि बच्चा अब उठो, पुस्तकालय बन्द करना है तब बड़ी अनिच्छा से उठता। जिस दिन कोई उपन्यास अधूरा छूट जाता, उस दिन मन में कसक होती कि काश इतने पैसे होते कि सदस्य बन कर किताब ईश्यू करा लाता, या काश इस किताब को […]

‘हाशिए खिंचते रहते हैं’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

हाशिए खिंचते रहते हैं, मेरे कागज घिरते रहते हैं, हर क्षण बदलते पाता हूँ, खुद को और अपने शब्दों को कुछ शब्द समान रहते हैं, जैसे सब एक ही आसमान कहते हैं गुत्थियाँ सुलझती रहती हैं, अधिकतर तो उलझती रहती हैं, कहानियों का कहाँ अंत है? इनकी यात्रा तो शायद अनंत है! हाशिए टेढ़े-मेढ़े होते […]

‘कुछ प्रश्न’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

‘काला’ होता है आखिरकितना ‘काला’?‘गोरा’ आखिर होता हैकितना ‘गोरा’?‘पूरा’ कितना ‘पूरा’ होता है?कितने ‘अँधेरे’ में ‘अँधेरे’ को रहना पड़ता है?कितनी ‘ऊँचाई’ पर ‘ऊँचे’ को चढ़ना होता है?किस क्षण कह दें हमकि ‘सवेरा हो गया?’किस पल बुझा दें हम,सब रोशनी सोने के लिये?क्या है ऐसा किताबों में,जो पढ़ नहीं सकते?आखिर किस कहानी को हम,मन में गढ़ […]

‘चींटी की राह’ – हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

फिर रोकी राह उसकी,कहा- ‘यहाँ से नहीं’दूसरे छोर पहुँची, तो भीकहा- ‘यहाँ से नहीं’वो पूछती रही, मुझसे“तो यहाँ से?”और मैं केवल कहता‘नहीं, यहाँ से नहीं’वो कोशिश करती रही,मेरे उत्तर को बदलने की,मैं भी जान गया,वो रुकेगी नहीं,पूछती रहेगी,ढूँढ़ निकालेगी अपनी राह,वो करती रहेगी,कोशिश अपनी।

‘एक-क्लिक’- हिंदी कविता- PAmit Hindi Poems

एक क्लिक पर जो भी कुछ मिल जाता है, उससे ही केवल कहाँ ?यह जीवन चल पाता है !वह क्लिक करता रहा रातभर,और मैं सोता रहा रातभरसुबह को वह हारा हुआ था, थका हुआ था,वह अभी जीवन जीने को रुका हुआ था।मेरी आँखों में चमक थी, चाँदी-सी,उसे अब भी फिक्र थी चाँदी की।दिन गुजरा मानो […]

माँग की सिन्दूर-रेखा (सबसे प्रिय कविता)- BY KUMAR Vishwas

माँग की सिन्दूर-रेखा, तुमसे यह पूछेगी कल… “यूँ मुझे सिर पर सजाने का तुम्हें अधिकार क्या है?” तुम कहोगी- “वह समर्पण बचपना था” तो कहेगी… “गर वो सब कुछ बचपना था, तो कहो फिर प्यार क्या है?” कल कोई अल्हड़, अयाना, बावरा झोंका पवन का, जब तुम्हारे इंगितों पर, गन्ध भर देगा चमन में, या […]


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