Blog

‘लौटकर आना साथी’- हिंदी कविता- PAMIT Hindi Poems

लौटकर आना साथी
तुम्हें यहीं मिल जाउंगा
मैं वहीं मिल जाउंगा
हम, जहाँ अलग हुए थे,
या बिछड़ गए थे, और,
वक्त से कुछ पिछड़ गए थे।

‘क्या-क्या नहीं सृष्टा ने उसको दिया’- हिंदी कविता- PAMIT Hindi Poems

समय की चाल तय है, वह ग्रस लेगा उसे,
अनिश्चित है कब, कहाँ, यह व्याल डस लेगा उसे।
बाजार की भीड़ में वह खुद दांव पर है,
नहीं पता उसे, वह समूचा मामूली भाव पर है।

लोड हो रहा है…

Something went wrong. Please refresh the page and/or try again.

मेरे बारे में

मेरा नाम अमित है, जो इस ब्लॉग पर हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखकों की कविताएँ व कुछ अपनी स्वरचित कविताएँ भी प्रकाशित करता हूँ। मैं उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में रहता हूँ, तथा स्नातक(B.A.) का विद्यार्थी हूँ।

Subscribe to My Blog

Get new content delivered directly to your inbox.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s